“Jagran EVolution Bharat Conclave 2026 में विशेषज्ञों ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की धीमी गति पर गहन चर्चा की। 2025 में कुल EV बिक्री 22 लाख से अधिक यूनिट्स पहुंची, लेकिन पैसेंजर वाहनों में पेनेट्रेशन सिर्फ 4-5% रहा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, हाई अपफ्रंट कॉस्ट, बैटरी डिपेंडेंसी और हालिया पॉलिसी शिफ्ट्स जैसे GST में बदलाव मुख्य कारण बताए गए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2030 तक 30% टारगेट हासिल करने के लिए तेज चार्जिंग नेटवर्क, लोकल बैटरी प्रोडक्शन और किफायती मॉडल्स की जरूरत है।”
Jagran EV Conclave 2026 में भारत की EV बिक्री की धीमी रफ्तार पर विशेषज्ञों की राय और भविष्य की रणनीति
Jagran के Evolution Bharat 2026 EV Conclave में इंडस्ट्री लीडर्स, पॉलिसी मेकर्स और एक्सपर्ट्स ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में ग्लोबल EV रेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी टेक्नोलॉजी और मार्केट डायनामिक्स पर कई सेशन हुए, जहां यह साफ हुआ कि भारत EV क्रांति की दहलीज पर है, लेकिन रफ्तार अभी अपेक्षा से कम है।
2025 में भारत में कुल EV रिटेल सेल्स 2.27 मिलियन यूनिट्स तक पहुंचीं, जो 2024 के मुकाबले 16% ज्यादा है। पैसेंजर EV सेगमेंट में पेनेट्रेशन 4-5% के आसपास रहा, जबकि दोपहिया और तिपहिया में यह काफी बेहतर है। फरवरी 2026 में पैसेंजर EV रिटेल सेल्स 13,733 यूनिट्स रहीं, जो सालाना आधार पर 44% की बढ़ोतरी दिखाती है। Tata Motors ने 5,568 यूनिट्स के साथ लीड किया, Mahindra ने 2,913 यूनिट्स बेचीं (473% YoY ग्रोथ), जबकि MG और अन्य ब्रैंड्स भी मजबूत रहे। हालांकि, जनवरी 2026 के 18,470 यूनिट्स से फरवरी में गिरावट आई, जो मौसमी और छोटे महीने का असर माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार EV बिक्री की धीमी रफ्तार के मुख्य कारण ये हैं:
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी : शहरों में चार्जिंग पॉइंट्स उपलब्ध हैं, लेकिन हाईवे और टियर-2/3 शहरों में यह बेहद सीमित है। रेंज एंग्जायटी सबसे बड़ा डर बना हुआ है। पेट्रोल पंपों की तरह हर जगह फास्ट चार्जर नहीं हैं, जिससे लंबी यात्राओं में EV चुनना मुश्किल हो जाता है।
उच्च अपफ्रंट कॉस्ट और प्राइस सेंसिटिविटी : EV की शुरुआती कीमत ICE वाहनों से ज्यादा है। 2025 में GST 2.0 से ICE वाहनों पर टैक्स कम होने से उनकी कीमतें घटीं, जिसने EV vs ICE के बीच गैप बढ़ा दिया। भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में यह बड़ा फैक्टर है।
बैटरी और सप्लाई चेन पर निर्भरता : भारत अभी भी लिथियम-आयन बैटरी सेल्स के लिए 95-100% चीन और अन्य पूर्वी एशियाई देशों पर निर्भर है। लोकल प्रोडक्शन बढ़ रहा है, लेकिन स्केल और कॉस्ट में कमी आने में समय लगेगा। बैटरी रिसाइक्लिंग इंफ्रा भी कमजोर है।
पॉलिसी और सब्सिडी में असंगति : FAME स्कीम और राज्य स्तर के इंसेंटिव्स ने शुरुआत में बूस्ट दिया, लेकिन हालिया बदलाव जैसे सब्सिडी कटौती या ICE पर टैक्स राहत ने EV को महंगा बना दिया। ग्लोबल स्तर पर भी 2026 में ग्रोथ 15-16% रहने का अनुमान है, जो 2025 के 20% से कम है।
हाइब्रिड्स की बढ़ती अपील : हाइब्रिड वाहन EV से सस्ते और रेंज में बेहतर साबित हो रहे हैं, जिससे कई खरीदार EV की बजाय हाइब्रिड चुन रहे हैं।
एक्सपर्ट्स की राय और आगे की प्लानिंग:
चार्जिंग नेटवर्क का तेज विस्तार : महिंद्रा Charge_IN जैसी अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ावा देना जरूरी है। सरकारी-प्राइवेट पार्टनरशिप से हाईवे पर हर 50-100 किमी पर चार्जर लगाने की जरूरत है।
लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग : PLI स्कीम के तहत बैटरी प्रोडक्शन बढ़ाना, BYD जैसी कंपनियों के साथ टाई-अप और रिसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाना। 2032 तक बैटरी डिमांड 256 GWh तक पहुंच सकती है।
किफायती मॉडल्स और फाइनेंसिंग : 10-15 लाख रुपये वाले ज्यादा EV लॉन्च करने, लोन पर सब्सिडी और लो EMI ऑप्शंस से अपनापन बढ़ेगा।
पॉलिसी स्टेबिलिटी : केंद्र और राज्यों में एकसमान पॉलिसी, GST में EV को फेवर करने और इंसेंटिव्स को लंबे समय तक जारी रखना।
स्किलिंग और सर्विस नेटवर्क : EV टेक्नीशियन ट्रेनिंग और सर्विस सेंटर्स बढ़ाना, क्योंकि मेंटेनेंस और रिसेल वैल्यू की चिंता ग्राहकों में है।
Conclave में Hyundai, MG, VinFast, Mahindra, BYD जैसी कंपनियों को अवॉर्ड्स मिले, जो इंडस्ट्री में इनोवेशन दिखाते हैं। कुल मिलाकर, भारत 2030 तक 30% EV पेनेट्रेशन का टारगेट हासिल कर सकता है, लेकिन इसके लिए इंफ्रा, कॉस्ट रिडक्शन और पॉलिसी सपोर्ट पर फोकस जरूरी है।
Disclaimer : यह लेख न्यूज रिपोर्ट और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की चर्चा पर आधारित है।