ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत VIX में पिछले दो सत्रों में 50% से अधिक की तेज उछाल आई है, जो बाजार में भय और अनिश्चितता का स्पष्ट संकेत है। यह ‘फियर गेज’ अब 21 के स्तर के करीब पहुंचकर 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और रुपये पर दबाव से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो मुद्रास्फीति, रुपये की कमजोरी और शेयर बाजार में और अस्थिरता आ सकती है।
ईरान-अमेरिका युद्ध से बाजार में हड़कंप, India VIX 50% उछला
India VIX, जिसे बाजार का ‘फियर गेज’ या भय सूचकांक भी कहा जाता है, भारतीय शेयर बाजार में आने वाली अस्थिरता का अनुमान लगाता है। यह NSE द्वारा संचालित Nifty ऑप्शंस की कीमतों से कैलकुलेट किया जाता है और अगले 30 दिनों में Nifty में अपेक्षित उतार-चढ़ाव को प्रतिशत में दर्शाता है। सामान्यतः India VIX 15 से नीचे होने पर बाजार स्थिर माना जाता है, 20 के आसपास मध्यम अस्थिरता और 30 से ऊपर होने पर उच्च भय की स्थिति होती है।
पिछले दो ट्रेडिंग सत्रों में यह इंडेक्स 50% से अधिक उछलकर 21.14 के स्तर तक पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। इससे पहले यह 13-14 के आसपास ट्रेड कर रहा था। इस तेज उछाल का मुख्य कारण ईरान-अमेरिका (US-Israel-Iran) संघर्ष का तेज होना है, जहां अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले हुए और ईरान ने जवाबी मिसाइल अटैक किए। इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ाई, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडराने से क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 80 डॉलर के करीब पहुंच गईं।
भारत जैसे बड़े क्रूड आयातक देश के लिए यह बड़ा खतरा है क्योंकि हमारी 85-90% क्रूड जरूरतें आयात से पूरी होती हैं और इनमें से काफी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। यदि यह रूट प्रभावित हुआ तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी, रुपये पर दबाव आएगा और RBI की ब्याज दर नीति प्रभावित हो सकती है।
India VIX के हालिया स्तर और ऐतिहासिक संदर्भ
| अवधि | India VIX स्तर (लगभग) | बदलाव (%) | कारण |
|---|---|---|---|
| सामान्य (स्थिर बाजार) | 12-15 | – | कम अस्थिरता |
| हालिया (पिछले सप्ताह) | 13-14 | – | सामान्य ट्रेडिंग |
| दो सत्र पहले | ~13.70 | – | – |
| पिछले दो सत्र | 21.14 तक | +50%+ | ईरान-अमेरिका युद्ध उछाल |
| इंट्राडे हाई | 21.3675 | – | संघर्ष की चरम प्रतिक्रिया |
| 52-सप्ताह हाई | 23.19 | – | पिछले उच्च स्तर |
| ऐतिहासिक पीक | 92.5 (2008 क्राइसिस) | – | ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस |
| COVID पीक | 87 (2020) | – | महामारी |
यह उछाल COVID के शुरुआती हफ्तों के बाद सबसे तेज है। जब VIX ऊपर जाता है तो निवेशक हेजिंग के लिए ऑप्शंस प्रीमियम ज्यादा चुकाते हैं, जो बाजार में डर दिखाता है।
संघर्ष के भारत पर प्रभाव
क्रूड ऑयल और मुद्रास्फीति : तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे CPI मुद्रास्फीति 5-6% के ऊपर जा सकती है।
रुपया पर दबाव : रुपये हाल में 91 के स्तर पर पहुंच चुका है, और तेल बिल बढ़ने से CAD चौड़ा हो सकता है।
शेयर बाजार : Sensex और Nifty में 1-2% की गिरावट देखी गई, FIIs ने निकासी तेज की। बैंकिंग, ऑटो और FMCG जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं जबकि डिफेंस और ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियां फायदे में रह सकती हैं।
ग्लोबल रिस्क : यदि संघर्ष लंबा चला तो ग्लोबल ग्रोथ प्रभावित होगी, जिसका असर भारत के एक्सपोर्ट और रेमिटेंस पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए सलाह
पोर्टफोलियो में हेजिंग बढ़ाएं, जैसे पुट ऑप्शंस या VIX फ्यूचर्स।
कैश पोजीशन बनाए रखें और ओवरलीवरेज्ड पोजीशन से बचें।
गोल्ड और सेफ-हेवन एसेट्स में कुछ एक्सपोजर रखें।
लंबी अवधि के निवेशक डिप में क्वालिटी स्टॉक्स खरीद सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्क रहें।
यह स्थिति बाजार के लिए बड़े खतरे की घंटी है, जहां अस्थिरता बढ़ने से बड़े सुधार की आशंका बनी हुई है।
Disclaimer : यह न्यूज रिपोर्ट और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। बाजार जोखिमों के अधीन है।