“रुपया आज डॉलर के मुकाबले 50 पैसे कमजोर होकर 90.80 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और FII की लगातार बिकवाली ने दबाव बढ़ाया, जबकि मजबूत डॉलर और व्यापार घाटा भी जिम्मेदार। RBI की हल्की दखल से गिरावट सीमित रही, लेकिन आगे दबाव बरकरार रह सकता है।”
रुपये में आज भारी गिरावट दर्ज हुई, जहां यह डॉलर के मुकाबले 50 पैसे टूटकर 90.80 पर बंद हुआ। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.30 पर खुला और दिन के दौरान 90.90 तक लुढ़का।
कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक तनाव से उछाल आया, जहां Brent crude 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। भारत, जो अपनी 80% से ज्यादा तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, पर इसका सीधा असर पड़ा, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने दबाव और बढ़ाया। जनवरी में अब तक FPI ने भारतीय इक्विटी बाजार से 19,015 करोड़ रुपये निकाले, जो US tariffs और वैश्विक जोखिम से प्रभावित। मजबूत डॉलर इंडेक्स, जो 105 के ऊपर कारोबार कर रहा है, ने भी रुपये पर असर डाला।
व्यापार घाटा नवंबर में 24.53 बिलियन डॉलर तक सिमटा, लेकिन US के 50% tariffs से निर्यात प्रभावित हुए, खासकर जेम्स, ज्वेलरी और ऑटो पार्ट्स सेक्टर में। RBI ने स्पॉट मार्केट में हल्की दखल दी, लेकिन व्यापक हस्तक्षेप से बचा।
रुपये की गिरावट के मुख्य कारण:
कच्चा तेल: कीमतों में 5% उछाल से आयात बिल बढ़ा।
FII बिकवाली: जनवरी में 19,015 करोड़ रुपये की निकासी।
मजबूत डॉलर: US आर्थिक डेटा से डॉलर इंडेक्स मजबूत।
व्यापार घाटा: US tariffs से निर्यात में 15% गिरावट।
| कारक | प्रभाव | आंकड़े |
|---|---|---|
| कच्चा तेल कीमत | रुपया कमजोर | Brent crude: 85+ डॉलर/बैरल |
| FII निकासी | बाजार दबाव | 19,015 करोड़ रुपये (जनवरी) |
| डॉलर इंडेक्स | मुद्रा असंतुलन | 105+ स्तर |
| व्यापार घाटा | डॉलर मांग | 24.53 बिलियन डॉलर (नवंबर) |
आगे रुपया 91 के स्तर तक फिसल सकता है अगर तेल कीमतें 90 डॉलर पार करें या FII निकासी जारी रही। निर्यात विविधीकरण और FTA से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन US-भारत व्यापार वार्ता में देरी जोखिम बढ़ा रही है।
असर वाले सेक्टर:
ऊर्जा: ईंधन कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
निर्यात: tariffs से जेम्स और ऑटो सेक्टर प्रभावित।
स्टॉक मार्केट: FII बिकवाली से सेंसेक्स 500 अंक गिरा।
उपभोक्ता: आयातित सामान महंगा, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स।
RBI की नीति में बदलाव से रुपया स्थिर हो सकता है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बरकरार।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट्स, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।