“सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बीच ज्वेलरी इंडस्ट्री ने बजट 2026 से इंपोर्ट ड्यूटी 6% से घटाकर 4% या कम करने और GST 3% से 1.25% तक कम करने की मांग की है। इससे कीमतें किफायती होंगी, मांग बढ़ेगी और तस्करी रुकेगी। वर्तमान में 10 ग्राम सोना 1.75 लाख रुपये के आसपास है, जो आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर हो रहा है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि बिना राहत के 2026 में मांग 600-700 टन तक गिर सकती है।”
सोने की कीमतों में हालिया उछाल ने ज्वेलरी सेक्टर को हिला दिया है। 2025 में 76.5% की वृद्धि के बाद 2026 में भी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 29 जनवरी को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,76,121 रुपये पर खुला, लेकिन गिरावट के साथ 1,75,340 रुपये पर बंद हुआ। चार दिनों में 21,000 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में सोना 5,104 डॉलर प्रति औंस तक गिरा, लेकिन घरेलू स्तर पर रुपए की कमजोरी ने कीमतों को ऊंचा रखा।
ज्वेलरी इंडस्ट्री के लीडर्स, जैसे ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC), ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वे सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% या उससे कम करने की अपील कर रहे हैं। इससे कच्चे माल की लागत कम होगी, जो अंततः उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाएगी। साथ ही, ज्वेलरी पर लगने वाले GST को 3% से घटाकर 1.25% करने की सिफारिश की गई है, ताकि मध्यम वर्ग की खरीदारी क्षमता बढ़े।
ज्वेलरी इंडस्ट्री की प्रमुख मांगें
इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती : वर्तमान 6% ड्यूटी को 3-4% तक कम करें, ताकि तस्करी पर लगाम लगे और घरेलू कीमतें स्थिर हों।
GST राहत : ज्वेलरी पर 3% GST को 1-1.25% तक घटाएं, जिससे खरीदारी बढ़े और सेक्टर में रोजगार सुरक्षित रहें।
PAN लिमिट बढ़ाना : 2 लाख रुपये से अधिक की खरीद पर PAN अनिवार्यता की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करें, क्योंकि कीमतों की वजह से सामान्य खरीदारी भी इस दायरे में आ रही है।
गोल्ड मुद्रीकरण योजना को मजबूत बनाना : घरों में पड़े 24,000 टन सोने को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए योजना को आकर्षक बनाएं।
सीमा शुल्क प्रक्रिया सरल : निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कस्टम प्रक्रियाओं को आसान बनाएं।
सोने की कीमतों का शहरवार विश्लेषण (30 जनवरी 2026)
| शहर | 24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम) | 22 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम) | बदलाव (पिछले दिन से) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,67,280 | ₹1,53,340 | -₹500 |
| चेन्नई | ₹1,68,050 | ₹1,54,046 | -₹450 |
| बैंगलोर | ₹1,67,700 | ₹1,53,725 | -₹600 |
| हैदराबाद | ₹1,67,830 | ₹1,53,844 | -₹550 |
| कोलकाता | ₹1,67,840 | ₹1,53,853 | -₹520 |
यह गिरावट मुनाफावसूली से आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताएं कीमतों को फिर ऊपर ले जा सकती हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के अनुसार, 2026 में सोने की मांग 600-700 टन तक गिर सकती है, अगर कीमतें यूं ही बढ़ती रहीं।
सेक्टर पर प्रभाव
उच्च कीमतों ने आभूषण खरीद को प्रभावित किया है। 2025 में मांग 710.9 टन रही, जो 5 साल का न्यूनतम है। निवेश मांग बढ़ रही है, लेकिन आभूषण सेगमेंट में गिरावट से लाखों कारीगरों की नौकरियां खतरे में हैं। इंडस्ट्री का अनुमान है कि GST और ड्यूटी में कटौती से मांग 20-25% बढ़ सकती है, जो निर्यात को भी बूस्ट देगी।
मलाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद ने कहा कि नीतिगत निरंतरता जरूरी है, ताकि घरेलू सोने का उपयोग बढ़े। डिवाइन सॉलिटेयर्स के एमडी जिग्नेश मेहता ने नेचुरल डायमंड पर ड्यूटी घटाने की मांग की। कुल मिलाकर, बजट 2026 इस सेक्टर के लिए निर्णायक साबित होगा।
वैश्विक कारक और भविष्यवाणियां
वैश्विक अनिश्चितताएं : युद्ध और व्यापार विवाद सोने को सुरक्षित निवेश बनाते हैं।
केंद्रीय बैंक खरीद : सेंट्रल बैंक सोने के भंडार बढ़ा रहे हैं, जो कीमतों को सपोर्ट देता है।
2026 अनुमान : मोतीलाल ओसवाल का टारगेट MCX पर सोने के लिए 1.80 लाख रुपये, चांदी के लिए 3.20 लाख रुपये प्रति किलो।
जोखिम : डॉलर की मजबूती और ब्याज दरें कीमतों को दबा सकती हैं।
इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स का मानना है कि बिना सरकारी समर्थन के सेक्टर की ग्रोथ रुक सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
Disclaimer: यह रिपोर्ट बाजार के रुझानों और इंडस्ट्री की मांगों पर आधारित है। निवेश सलाह के रूप में न लें। बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है।